यहाँ गुरु जी का जन्म दिन बहुत धूम धाम से मनाया जाता था। गुरु जी के जन्म दिन पर सारे दिल्ली और सारे भारत के लोग यहाँ आते थे। यहाँ के मंदिर, बसिंदो और पहाड़ ने वो सब भी देखा था जब भारत को आज़ाद करने के लिए नेता लोग यहाँ ढोंग रचते थे। मंदिर, बसिंदो और पहाड़ ने ब्रिटेन के बड़े बड़े राजा महाराजाओं को यहाँ के चक्कर काटते हुए भी देखा था। वर्ष 1970 में, मैं छोटा था। पहली बार गुरु जी का जन्म दिन देखा था बहुत मज़ा आया था। तरह तरह की झांकियां, ढोल ,तासे , तरह तरह के बैण्ड बाजे, सरदारों के जलूस की तरह इस जलूस में भी नौजवान लाठी घुमा कर खेल दिखाते थे युवकों की टोली भांगड़ा डांस करती थी । बढ़िया झांकी को मेडल/इनाम और सर्टिफिकेट भी दिया जाता था। लाठी का खेल करने वाले युवकों को तथा भांगड़ा करने वाले युवकों को मेडल/इनाम/सर्टिफिकेट दिया जाता था
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